ट्रंप ने NATO देशों को बताया ‘कागजी शेर’, बोले- अमेरिका इनको हमेशा याद रखेगा

नई दिल्ली। अमेरिका और इस्राइल के साथ जारी संघर्ष में ईरान ने मोर्चा और तेज कर दिया है। युद्ध के 22वें दिन खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान लगातार अमेरिका और इस्राइल के ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है, जिससे पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, ईरान ने बहरीन, यूएई और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके साथ ही इस्राइल पर भी ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। हालात को और गंभीर बनाते हुए ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने लगी है।
तेल संकट के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट गहराने लगा है और कई देशों की चिंता बढ़ गई है।
ट्रंप का NATO पर तीखा हमला
इस बीच, Donald Trump ने NATO देशों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के खिलाफ इस युद्ध में सहयोगी देश अमेरिका का साथ नहीं दे रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने NATO देशों को ‘कागजी शेर’ तक कह दिया। उन्होंने लिखा कि ये देश अमेरिका के बिना कुछ भी नहीं हैं और अब जब सैन्य स्थिति काबू में है, तो ये तेल की कीमतों को लेकर शिकायत कर रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए सैन्य कार्रवाई आसान और कम जोखिम भरी है, लेकिन सहयोगी देश पीछे हट रहे हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे देशों के रवैये को अमेरिका याद रखेगा।
यूरोपीय देशों ने बनाई दूरी
ट्रंप की अपील के बावजूद यूरोप के कई बड़े देशों ने इस युद्ध से दूरी बना ली है। ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई NATO देशों ने साफ कर दिया है कि यह अमेरिका का युद्ध है, NATO का नहीं। ऐसे में वे अपने सैनिकों को इस संघर्ष में नहीं भेजेंगे।
ईरान का जवाब और रणनीति
वहीं, तेहरान की ओर से कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर रोक सिर्फ अमेरिका और इस्राइल से जुड़े जहाजों पर है। ईरान इस कदम के जरिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर सके।
कुल मिलाकर, खाड़ी क्षेत्र में जारी यह संघर्ष अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करने लगा है, और आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।







