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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग तेज, ईरान ने ट्रंप को दी खुली चेतावनी

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 14वें दिन में पहुंच गया है। दोनों पक्षों की ओर से हमले लगातार तेज हो रहे हैं और हालात और अधिक तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इस बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है।

ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू करना आसान हो सकता है, लेकिन इसे कुछ ट्वीट्स के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। लारीजानी ने साफ कहा कि ईरान तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक अमेरिका अपनी गलती स्वीकार कर उसकी कीमत नहीं चुकाता।

अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ट्रंप त्वरित जीत की बात कर रहे हैं, लेकिन युद्ध का अंत इतने आसान तरीके से नहीं हो सकता। उनका कहना था कि जब तक अमेरिका अपनी गलती नहीं मानता, ईरान पीछे हटने वाला नहीं है।

लारीजानी की यह प्रतिक्रिया डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं और अब वहां निशाना बनाने के लिए बहुत कम लक्ष्य बचे हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि वह जब चाहें इस युद्ध को समाप्त कर सकते हैं। अमेरिकी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ईरान के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों पर बड़े हमले किए जा चुके हैं और युद्ध का अंत ज्यादा दूर नहीं है।

इसी बीच ईरान में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम भी सामने आया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ने 12 मार्च को अपने पहले संबोधन में अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया।

अपने संबोधन में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि हमलों में मारे गए लोगों का बदला लेना ईरान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शहीदों के खून को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और खासकर मिनाब में मारे गए लोगों और बच्चों की मौत का बदला जरूर लिया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने पड़ोसी खाड़ी देशों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखना चाहता है, लेकिन उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना जारी रहेगा जिनका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया जा रहा है, खासकर खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस।

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से यह संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस जंग में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और कई सैन्य तथा ऊर्जा ठिकाने तबाह हो चुके हैं।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत समेत कई देशों में ईंधन आपूर्ति प्रभावित हो रही है। पाकिस्तान, फ्रांस, अमेरिका, पोलैंड, वियतनाम, जर्मनी, श्रीलंका, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी ईंधन की कमी की खबरें सामने आ रही हैं।

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