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मतदाता सूची विवाद पर ममता बनर्जी का धरना, 63 लाख नाम हटाने को बताया साजिश

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के विरोध में शुक्रवार (6 मार्च) को कोलकाता में धरना शुरू किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है।

सीएम ममता बनर्जी ने सेंट्रल कोलकाता के धर्मतल्ला स्थित मेट्रो चैनल पर दोपहर करीब 2 बजे धरना शुरू किया। इस दौरान मंच पर तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जबकि हजारों की संख्या में समर्थक भी वहां पहुंचे। देर रात ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं से घर जाकर आराम करने को कहा, लेकिन वह खुद रातभर टेंट में ही धरने पर बैठी रहीं। शनिवार (7 मार्च) को धरना दोबारा जारी रहेगा।

धरना शुरू करते हुए ममता बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मृत घोषित किया गया है, लेकिन वे वास्तव में जीवित हैं, उन्हें वह मंच पर लाकर दिखाएंगी।

यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की प्रस्तावित पश्चिम बंगाल यात्रा से ठीक पहले हो रहा है। चुनाव आयोग की टीम 8 मार्च को राज्य पहुंचेगी और 10 मार्च तक यहां रहेगी। इस दौरान आयोग के अधिकारी राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे।

दरअसल, चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को विशेष गहन पुनरीक्षण पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल की संशोधित मतदाता सूची जारी की थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवंबर में शुरू हुए SIR अभियान के बाद अब तक करीब 63.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इसके बाद राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अलावा 60 लाख से अधिक मतदाताओं को फिलहाल ‘विचाराधीन’ या ‘न्यायिक जांच के अधीन’ श्रेणी में रखा गया है। इन मतदाताओं की पात्रता पर आने वाले हफ्तों में न्यायिक प्रक्रिया के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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