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पूर्व केंद्रीय मंत्री केपी उन्नीकृष्णन का निधन, केरल की राजनीति में शोक की लहर

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केपी उन्नीकृष्णन का कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और पिछले कुछ समय से इलाज करा रहे थे। उनके निधन से केरल की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया।केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि राज्य ने एक अनुभवी और वैचारिक राजनीति के मजबूत स्तंभ को खो दिया है।

केपी उन्नीकृष्णन उन नेताओं में शामिल थे, जो संसद को केवल संख्याओं का मंच नहीं, बल्कि विचारों और बहस का केंद्र मानते थे। समाजवादी विचारधारा से प्रभावित उन्नीकृष्णन लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे। राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी संभाली और आपातकाल के समय तानाशाही प्रवृत्तियों के मुखर आलोचक रहे। उनकी राजनीतिक यात्रा स्वतंत्रता के बाद भारत की वैचारिक उथल-पुथल को प्रतिबिंबित करती है।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से की थी और 1960 के दशक की शुरुआत में कांग्रेस में शामिल हुए। 1962 में वह कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका की शुरुआत हुई। 1971 में वडाकारा लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वह कई बार सांसद रहे और अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार बनाए रखा, जो अक्सर दलगत सीमाओं से परे माना जाता था।

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