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पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन, 71 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने निधन की पुष्टि की। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती थे। रात करीब 1:30 बजे कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।मुकुल रॉय वर्ष 2024 से डिमेंशिया सहित कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत अधिक खराब थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज चल रहा था, लेकिन देर रात उनका निधन हो गया।

तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में थे शामिल

All India Trinamool Congress के गठन (जनवरी 1998) के समय मुकुल रॉय संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उन्हें ममता बनर्जी के बाद पार्टी का दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। पार्टी में उन्होंने संगठनात्मक भूमिका निभाई और महासचिव जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली। वे 2006 में राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 से 2012 तक उच्च सदन में पार्टी के नेता रहे।

केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने पहले जहाजरानी राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में मार्च 2012 में उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री का पद संभाला। राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका रही और वे नई दिल्ली में पार्टी के प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाते थे।

भाजपा में शामिल होकर फिर की घर वापसी

साल 2019 में मुकुल रॉय ने Bharatiya Janata Party का दामन थाम लिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन में उनकी रणनीतिक भूमिका मानी गई। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने कृष्णानगर उत्तर सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने पुनः तृणमूल कांग्रेस में वापसी कर ली।

नेताओं ने जताया शोक

भाजपा नेता दिलीप घोष ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने कहा कि भाजपा में आने पर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया था, लेकिन बाद में वे अस्वस्थता के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।मुकुल रॉय के निधन से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

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