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हिमाचल विधानसभा में आरडीजी बहाली प्रस्ताव पारित, सुक्खू ने विपक्ष पर साधा निशाना

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले तीन दिन सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हंगामे के बीच राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की बहाली का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर केंद्र को भेजने की सिफारिश की जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आरडीजी बहाली के लिए नियम 102 के तहत चर्चा प्रस्तुत की, जिस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पिछली और वर्तमान सरकार को मिली केंद्रीय मदद के आंकड़े पेश किए।

विपक्ष भड़क गया और भाजपा विधायक करीब 45 मिनट तक वेल में बैठकर हंगामा करते रहे। इस दौरान प्रस्ताव पारित हो गया। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यदि आरडीजी बहाल नहीं हुई तो राज्य के बजट में 15 प्रतिशत कटौती करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि हिमाचल में विकास कार्यों के लिए आरडीजी की आवश्यकता 1952 से रही है।

हंगामे और स्थगन

बजट सत्र की तीसरी बैठक के दौरान विपक्ष लगातार हंगामा करता रहा। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को 10 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में भी भाजपा विधायक वेल में बैठे रहे। मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के 15वें और 16वें वित्त आयोग के वक्तव्यों को पढ़कर दिखाया, जिसमें जयराम ठाकुर ने हिमाचल को अधिक धन की आवश्यकता बताई थी।

सीएम सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने प्रदेश की संपदा को लुटाया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सुन्नी और लुहरी बिजली प्रोजेक्ट, 5,000 बीघा जमीन एक करोड़ रुपये लीज पर देने जैसे फैसले लिए गए। वहीं वर्तमान सरकार ने हिमकेयर और सहारा जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया और जनकल्याण के काम किए।

वित्तीय आंकड़े और विकास कार्य

सुक्खू ने बताया कि पिछले पांच साल में पूर्व सरकार ने 55,564 करोड़ और वर्तमान सरकार ने तीन साल में 50,030 करोड़ रुपये राजस्व कमाया। जीएसटी के कारण राज्य को 18,239 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वर्तमान सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य, पेंशनरों के बकाया, मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी, सीबीएससी स्कूल और अन्य जनकल्याण योजनाओं पर खर्च किया।

संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा

सुक्खू ने सदन में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर, टीटी कृष्णाचार्य, चौधरी महावीर त्यागी और कुलधर जैसी हस्तियों का हवाला देते हुए पहाड़ी राज्यों को आरडीजी दिए जाने का ऐतिहासिक महत्व बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अब आरडीजी के समर्थन में क्यों पीछे हट रहा है, जबकि यह हिमाचल के विकास और बजट के लिए बेहद जरूरी है। बजट सत्र की पहली चरण की कार्यवाही 18 मार्च तक स्थगित कर दी गई है। पहले तीन दिन में लगभग 18 घंटे 24 मिनट तक चर्चा चली और शून्यकाल में सदस्यों ने 10 महत्वपूर्ण विषय उठाए, जिनका मंत्रियों ने जवाब दिया।

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