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NGT ने ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट को दी मंजूरी, 10 लाख पेड़ कटेंगे लेकिन सुरक्षा शर्तें भी होंगी पूरी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की छह सदस्यों वाली स्पेशल बेंच ने सोमवार को 81,000 करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। एनजीटी ने अपने फैसले में कहा कि प्रोजेक्ट को पहले दी गई पर्यावरण मंजूरी में पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, इसलिए इसमें दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं है। ट्रिब्यूनल ने प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व और एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस पर पहले उठाए गए सवालों पर भी गौर किया।

प्रोजेक्ट के तहत 166 वर्ग किलोमीटर में फैले 130 वर्ग किलोमीटर जंगल की जमीन का डायवर्जन और लगभग 10 लाख पेड़ों की कटाई शामिल है। सरकार इस मेगा प्रोजेक्ट में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, सिविल और मिलिट्री एयरपोर्ट, तथा 450-MVA गैस और सोलर पावर प्लांट का निर्माण करेगी। केंद्र ने निकोबारी समुदाय की जमीन और पर्यावरणीय नुकसान की चिंताओं के बावजूद इसे आगे बढ़ाया है।

स्पेशल बेंच में एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव के साथ ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस दिनेश कुमार सिंह, जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और एक्सपर्ट मेंबर ए सेंथिल वेल, अफरोज अहमद और ईश्वर सिंह शामिल थे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्रोजेक्ट के स्ट्रेटेजिक महत्व को नकारा नहीं जा सकता और आइलैंड कोस्टल रेगुलेशन जोन (ICRZ) नियमों का पालन भी अनिवार्य है।

NGT ने साफ किया कि सरकार को पर्यावरणीय क्लीयरेंस की सभी शर्तों का पालन करना होगा। लेदरबैक समुद्री कछुए, निकोबार मेगापोड, खारे पानी के मगरमच्छ, रॉबर केकड़ा, निकोबार मकाक और द्वीप के अन्य एंडेमिक पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही फोरशोर डेवलपमेंट से रेतीले बीच और शोरलाइन को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह द्वीप मलक्का जलडमरूमध्य के करीब है और हिंद महासागर में भारत की सैन्य और व्यापारिक पकड़ मजबूत करेगा। इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में प्रमुख भूमिका निभाने और सुरक्षा के लिहाज से समुद्री निगरानी में बड़ी मदद मिलेगी।

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