हिमाचल में 62 बॉयज-गर्ल्स स्कूल मर्ज, अब बनेंगे 31 सह-शिक्षा कैंपस; 140 सरकारी स्कूल होंगे सीबीएसई से संबद्ध

हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा में गुणात्मक सुधार की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए 500 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी पर अलग-अलग कैंपस में संचालित 62 छात्र एवं छात्राओं के स्कूलों को मर्ज करने की मंजूरी दे दी है। मर्जर के बाद अब ये स्कूल 31 सह-शिक्षा संस्थानों के रूप में एक ही कैंपस में संचालित होंगे। 12 फरवरी को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इन स्कूलों को Central Board of Secondary Education से संबद्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रधानाचार्यों को निदेशालय तलब, संबद्धता की प्रक्रिया तेज
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने संबंधित सभी प्रधानाचार्यों को आवश्यक दस्तावेजों सहित निदेशालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। संबद्धता के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया निदेशालय स्तर पर ही पूरी कराई जाएगी। राज्य सरकार पहले ही 100 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ चुकी है। अब 40 और स्कूलों को जोड़ने की मंजूरी दी गई है, जिससे कुल संख्या 140 हो जाएगी। इनमें हाल ही में मर्ज किए गए 31 स्कूल भी शामिल हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में शिक्षा मंत्री Rohit Thakur, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
किन-किन शहरों के स्कूल हुए मर्ज
मर्ज किए गए स्कूलों में बिलासपुर, घुमारवीं, चंबा, शहीद कैप्टन मृदुल शर्मा हमीरपुर, नादौन, देहरा, धर्मशाला, इंदौरा, नगरोटा, नूरपुर, पालमपुर, जवाली, ज्वालामुखी, आनी, कुल्लू, भंगरोटू, जोगिंद्रनगर, सरकाघाट, मंडी, सुंदरनगर, नाहन, पांवटा साहिब, अर्की, कुनिहार, नालागढ़, सोलन, ऊना, जुब्बल, रामपुर, रोहड़ू और ठियोग के बॉयज एवं गर्ल्स स्कूल शामिल हैं।
शिक्षकों की कमी दूर होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग
विभाग का तर्क है कि सह-शिक्षा व्यवस्था लागू होने से प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और सीबीएसई संबद्धता हासिल करना आसान होगा। शिक्षकों और स्टाफ की तैनाती में संतुलन आएगा, आधारभूत ढांचे का बेहतर उपयोग संभव होगा तथा विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल का लाभ मिलेगा।
तीन साल में 1250 स्कूल मर्ज या बंद
राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 1250 स्कूलों को बंद या मर्ज किया है। इनमें से 450 स्कूल ऐसे थे, जहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं था। ऐसे स्कूलों को डी-नोटिफाई कर दिया गया। अब अलग-अलग चल रहे छात्र और छात्राओं के स्कूलों को एकीकृत कर सह-शिक्षा मॉडल लागू किया जा रहा है।







