मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजगीर दौरा: विकास परियोजनाओं की समीक्षा, ‘घर-घर गंगाजल’ योजना पर फिर उठे सवाल

बिहार की सियासत में हलचल उस समय तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नालंदा जिले के ऐतिहासिक शहर राजगीर पहुँचे। उनके दौरे की शुरुआत घोड़ा कटोरा स्थित गंगाजी जलाशय के निरीक्षण से हुई, जहाँ उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने वेणुवन में साउंड एंड लाइट सिस्टम परियोजना की आधारशिला रखी। इस पहल को विकास और सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चलने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य राजगीर को पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और सशक्त बनाना है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने मलमास मेले की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक भी की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण, स्वच्छता प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि आस्था के इस बड़े आयोजन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हालांकि, दूसरी ओर “घर-घर गंगाजल” योजना अब भी अधर में लटकी नजर आ रही है। गंगाजी जलाशय पार्ट-टू योजना के तहत नवादा जिले के मधुबन क्षेत्र में 517 एकड़ भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है, जिसमें 275 एकड़ निजी और शेष सरकारी जमीन शामिल है। अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है, जबकि पहले चरण की कार्यावधि अगस्त 2025 में ही समाप्त हो चुकी है।
योजना के दूसरे चरण में मधुबन से बिहार शरीफ तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र को सख्त संदेश देने की कोशिश भी है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि जलाशय निर्माण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आती है या फिर “घर-घर गंगाजल” योजना सियासी बहस का नया मुद्दा बनती है।







