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उत्तर प्रदेश में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नियम बदले, अब पैन कार्ड के बिना नहीं होगी रजिस्ट्री

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब राज्य में किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री पैन कार्ड के बिना नहीं हो सकेगी। इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में पैन नंबर की अनिवार्य प्रविष्टि और उसके सत्यापन के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम से बेनामी लेन-देन पर रोक लगेगी और जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता आएगी।

महानिरीक्षक निबंधन की ओर से प्रदेश के सभी उप निबंधकों को जारी आदेश में कहा गया है कि अचल संपत्ति के सभी विलेखों में स्थायी खाता संख्या यानी पैन कार्ड का उल्लेख अनिवार्य किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि संपत्ति पंजीकरण से जुड़े सभी ऑनलाइन आवेदनों में पक्षकारों के पैन नंबर की सही प्रविष्टि हो और नियमों के अनुसार पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए।

इसके साथ ही सरकार ने फॉर्म 60 के विकल्प को भी समाप्त कर दिया है। पहले जिन लोगों के पास पैन कार्ड नहीं होता था, वे आयकर विभाग के फॉर्म 60 को भरकर प्रॉपर्टी रजिस्ट्री करा लेते थे, लेकिन अब यह सुविधा नहीं मिलेगी। सरकार का मानना है कि पैन कार्ड को अनिवार्य करने से जमीन और मकानों में होने वाले अवैध और बेनामी निवेश पर लगाम लगेगी, साथ ही फर्जीवाड़े के मामलों में भी कमी आएगी।

गौरतलब है कि नोएडा, गाजियाबाद समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां एक ही जमीन की रजिस्ट्री कई लोगों के नाम कर दी गई। जमीन माफिया द्वारा की गई इस तरह की धोखाधड़ी से लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। नए नियम से ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

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