Budget 2025-26: AI युग में भारत की बड़ी छलांग, सेमीकंडक्टर सेक्टर को मिले 40 हजार करोड़

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत भी टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में बजट 2025-26 के तहत सरकार ने देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए 40,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश का ऐलान किया है।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि भारत अब सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन को पूरी तरह विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके लिए ISM 2.0 (India Semiconductor Mission 2.0) लॉन्च किया जाएगा, जिसके तहत उपकरण निर्माण, मटेरियल डेवलपमेंट, फुल-स्टैक चिप डिजाइन, इंडियन IP और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। साथ ही टेक्नोलॉजी और स्किल्ड मैनपावर तैयार करने के लिए इंडस्ट्री-लेड रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर भी फोकस किया जाएगा।
क्यों अहम है सेमीकंडक्टर में यह निवेश?
वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में रुकावटें, भू-राजनीतिक तनाव और AI, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, 5G/6G नेटवर्क, डिफेंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में चिप्स की बढ़ती मांग के बीच यह निवेश भारत की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग रणनीति को नई ताकत देगा। सेमीकंडक्टर सेक्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य घरेलू जरूरतों को देश में ही पूरा करना और भारत को 2030 के दशक तक एक ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाना है।
निवेश से क्या बदलेगा?
सरकार के इस कदम से सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर निवेशकों का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में सकारात्मक माहौल बनेगा। बाजार विश्लेषक इसे रणनीतिक सेक्टर में कैपेक्स आधारित ग्रोथ की निरंतरता के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
तेजी से बढ़ता भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार
अनुमानों के मुताबिक भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में तेज़ी से उभरने वाला है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, 2034 तक भारत के सेमीकंडक्टर बाजार का आकार करीब 177 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, 2026 से 2034 के बीच इस सेक्टर में 12 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर रहने का अनुमान जताया जा रहा है।
कुल मिलाकर, बजट 2025-26 में किया गया यह ऐलान भारत को टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के नए युग में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।







