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77वें गणतंत्र दिवस पर सीएम भगवंत मान का बयान, पंजाब की राजधानी और अधिकारों का मुद्दा उठाया

देशभर में सोमवार को 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पंजाब में राज्य स्तरीय समारोह फाजिल्का में आयोजित हुआ, जहां पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने होशियारपुर में तिरंगा फहराकर लोगों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब की राजधानी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के बावजूद पंजाब आज भी ऐसा एकमात्र राज्य है जिसकी अपनी राजधानी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब और उसकी राजधानी चंडीगढ़ के अधिकारों की रक्षा के लिए उनकी सरकार हर संभव कदम उठाएगी।

होशियारपुर में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की एकता व अखंडता की रक्षा करने वाले सशस्त्र बलों को सलाम किया। उन्होंने कहा कि पंजाब को आज भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। फिलहाल चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश है और पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त राजधानी के रूप में कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हर हाल में आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने सरकार की प्रमुख पहलों का जिक्र किया, जिनमें मुफ्त बिजली, युवाओं को सरकारी नौकरियां और नशे व गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त अभियान शामिल हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब को देश का ‘अन्नदाता’ कहा जाता है, लेकिन देश की प्रगति की कीमत राज्य को अपने प्राकृतिक संसाधनों के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी है। उन्होंने बताया कि भूजल स्तर लगातार गिरा है और नदियों का पानी प्रदूषित हुआ है। इसके बावजूद पंजाब के साथ अन्याय और मनमानी किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य ने सबसे अधिक बलिदान दिए हैं।

सीएम मान ने आरोप लगाया कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड पर पंजाब के अधिकारों को खत्म करने की साजिश रची गई थी, जिसे उनकी सरकार ने नाकाम कर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना की संरचना बदलने का भी आरोप लगाया और कहा कि इससे अनुसूचित जाति के श्रमिकों, महिलाओं और भूमिहीन परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि संविधान राज्यों को अधिकार देता है, फिर भी पंजाब को अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

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