भारत ने 114 राफेल विमानों की खरीद के लिए फ्रांस से प्रस्तावित सौदे को मंजूरी दी

भारत सरकार अपनी सेना की ताकत बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा खरीद बोर्ड (Defence Procurement Board – DPB) ने फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होने जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये (करीब 36 अरब अमेरिकी डॉलर) है।
फरवरी में हो सकती है डील की अंतिम मंजूरी
रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने रखा जाएगा। DAC की मंजूरी के बाद मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को भेजा जाएगा। CCS की हरी झंडी मिलने के बाद यह सौदा अंतिम रूप ले सकता है। संभावना है कि फरवरी 2026 में प्रस्तावित भारत-फ्रांस शिखर बैठक के दौरान समझौते पर दस्तखत हो सकते हैं।
मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनेगा अधिकांश हिस्सा
इस सौदे के तहत 12 से 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से फ्लाई-ऑवे स्थिति में आएंगे, जबकि बाकी विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में तैयार होगा। शुरुआत में इन विमानों में लगभग 30% स्वदेशी सामग्री शामिल होगी, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जाएगा। इस डील से भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
राफेल का युद्ध प्रदर्शन और ताकत
राफेल ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता साबित की थी, जहां भारतीय वायुसेना ने इन 4.5 पीढ़ी के मल्टी-रोल जेट्स को वास्तविक युद्ध में तैनात किया। SCALP क्रूज मिसाइल और HAMMER (AASM) प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों के इस्तेमाल से सीमाओं में बिना घुसे सटीक हमले किए गए। राफेल का स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम दुश्मन के राडार और मिसाइलों को जाम कर उसे नाकाम करने में सक्षम रहा। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल सक्रिय हैं, जबकि भारतीय नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल-मरीन वैरिएंट के ऑर्डर दिए हैं। नए सौदे के बाद भारत के पास कुल 176 राफेल विमान होंगे, जिससे वायुसेना की परिचालन क्षमता और पड़ोसी देशों से सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता बढ़ जाएगी।
राफेल को चुनने के कारण
इसका प्रमुख कारण मौजूदा बेड़े के साथ संगतता, कम रखरखाव खर्च, उच्च युद्ध क्षमता और फ्रांस के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। यह कदम न केवल वायु रक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।







