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घने कोहरे में नाले में गिरी कार, 90 मिनट तक जिंदगी से जूझता रहा सॉफ्टवेयर इंजीनियर, नहीं बच सकी जान

गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत युवराज मेहता नोएडा सेक्टर-150 स्थित अपने आवास, टाटा यूरेका पार्क, लौट रहे थे। वे मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार चला रहे थे। रास्ते में घना कोहरा छाया हुआ था, जिससे दृश्यता बेहद सीमित हो गई थी। इसी दौरान एक मोड़ पर नियंत्रण खोने से उनकी कार सड़क से फिसलकर एक खुले नाले में जा गिरी।

बताया जा रहा है कि यह नाला लगभग 50 फीट गहरा था और उसमें पानी भरा हुआ था। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना स्थल पर किसी भी तरह का बैरिकेड, चेतावनी संकेत या रिफ्लेक्टिव बोर्ड मौजूद नहीं था, जिससे वाहन चालक को खतरे का अंदाजा हो पाता।

कार की छत पर बैठकर बचने की कोशिश

हादसे के बाद युवराज ने सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह कार से बाहर निकलकर उसकी छत पर जगह बना ली। उस समय तक वाहन पूरी तरह पानी में नहीं डूबा था। उन्होंने तुरंत अपने पिता राज कुमार मेहता को फोन कर बताया कि उनकी कार नाले में गिर गई है और वे फंसे हुए हैं।

परिवार के अनुसार, फोन पर युवराज की आवाज घबराई हुई थी, लेकिन वे खुद को संभालने की कोशिश कर रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं। हालांकि, घने कोहरे और दुर्गम हालात के कारण राहत दल को मौके तक पहुंचने में देरी हुई।

90 मिनट तक चलता रहा संघर्ष

जब तक बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं, युवराज करीब डेढ़ घंटे तक कार की छत पर बैठे रहे। पुलिस के अनुसार, उन्हें बचाने के लिए रस्सियां फेंकी गईं, लेकिन वे गहराई तक नहीं पहुंच सकीं। फायर ब्रिगेड की सीढ़ियां और क्रेन भी नाले की गहराई और दूरी के कारण कार तक नहीं पहुंच पाईं।

इस दौरान कार के भीतर पानी लगातार भरता रहा। वजन बढ़ने के कारण वाहन धीरे-धीरे और नीचे धंसता चला गया। युवराज छत पर खड़े होकर मदद का इंतजार करते रहे, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए। अंततः कार पूरी तरह पानी में समा गई और युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी।

बाद में बरामद हुआ शव, उठे कई सवाल

घटना के बाद नाव की मदद से युवराज का शव बाहर निकाला गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

युवराज के पिता का कहना है कि वे अपने बेटे की मौत को अपनी आंखों के सामने होता देख रहे थे, लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। अब यह सवाल उठ रहा है कि जब सब कुछ मौजूद था सूचना, बचाव दल और संसाधन तो फिर समय रहते युवराज को क्यों नहीं बचाया जा सका।

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