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अंकिता भंडारी केस: उत्तराखंड बंद को नहीं मिला जनसमर्थन, सड़कों पर दिखी राजनीति

अंकिता भंडारी के नाम पर आज उत्तराखंड की सड़कों पर जो तस्वीर सामने आई, वह जनआक्रोश से अधिक राजनीतिक प्रदर्शन जैसी नजर आई। कांग्रेस द्वारा बुलाया गया उत्तराखंड बंद राज्यभर में असरहीन साबित हुआ। न आम जनता ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, न ही व्यापारियों ने समर्थन दिया। जमीनी हकीकत कांग्रेस के दावों के विपरीत दिखी।

कांग्रेस ने इस बंद को न्याय की आवाज बताया, लेकिन सवाल यह उठा कि जब अंकिता भंडारी मामले में पहले ही सीबीआई जांच की संस्तुति दी जा चुकी है, तो फिर बंद का औचित्य क्या था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता के अनुरोध पर सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद कई सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने साफ कहा था कि अब बंद का कोई औचित्य नहीं रह जाता, क्योंकि जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

खुले रहे बाजार, सामान्य रहा जनजीवन

बंद के दिन देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली सहित कई शहरों में बाजार खुले रहे और जनजीवन सामान्य दिखा। लोग रोजमर्रा के कामकाज में व्यस्त नजर आए। इसी बीच कई स्थानों से यह भी खबरें आईं कि कांग्रेस कार्यकर्ता जबरन दुकानें बंद कराने पहुंचे, जिसका व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने विरोध किया।

कई इलाकों में दुकानदारों ने जानबूझकर अपनी दुकानें खुली रखीं और कहा कि अगर न्याय की मांग है तो सरकार से सवाल किए जाएं, जनता और व्यापारियों को परेशान न किया जाए।

बंद समर्थकों और व्यापारियों में नोकझोंक

कुछ स्थानों पर बंद समर्थकों और व्यापारियों के बीच नोकझोंक की स्थिति भी बनी। इससे कांग्रेस के सफल बंद के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर और स्पष्ट हो गया। ज्यादातर संगठन और आम लोग इस बंद से खुद को अलग रखते नजर आए। परिणामस्वरूप यह बंद किसी जनांदोलन का रूप नहीं ले सका और राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित रह गया।

इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि अंकिता भंडारी केस में सीबीआई जांच की सिफारिश इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार ने शुरू से अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।

पूरा मामला

गौरतलब है कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर स्थित वनतारा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थी। वह 18–19 सितंबर 2022 की रात अचानक लापता हो गई थी। मामले में 23 सितंबर को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार की थी। उनकी निशानदेही पर 24 सितंबर को अंकिता का शव चील नहर से बरामद किया गया था।

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