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4 जनवरी से शुरू हो रहा माघ मास, जानें स्नान की शुभ तिथियां और धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में माघ मास का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा के अगले दिन से माघ महीने की शुरुआत होती है। इस वर्ष माघ मास 4 जनवरी 2026 से आरंभ हो रहा है। इससे पहले प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लगने वाले प्रसिद्ध माघ मेले का शुभारंभ 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन हो चुका है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वैसे तो पूरे माघ महीने में स्नान करना पुण्यदायी माना गया है, लेकिन कुछ विशेष तिथियों पर स्नान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

माघ मास में स्नान की प्रमुख शुभ तिथियां

मकर संक्रांति – 14 जनवरी, बुधवार
मौनी अमावस्या – 18 जनवरी, रविवार
बसंत पंचमी – 23 जनवरी, शुक्रवार
माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी, रविवार
महाशिवरात्रि – 15 फरवरी, रविवार

माघ मास का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास में सभी देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और प्रयागराज के संगम तट पर निवास करते हैं। पद्म पुराण में उल्लेख है कि इस महीने भगवान विष्णु की पूजा और तीर्थ स्नान करने से उतना ही पुण्य प्राप्त होता है, जितना एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने से मिलता है। माघ मास को ‘माधव मास’ भी कहा जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण का ही एक नाम है।

माघ महीने में किन बातों का रखें ध्यान

माघ मास में सूर्योदय से पहले स्नान करने का विशेष विधान है। यदि नदी या तीर्थ स्थान पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।इस दौरान काले तिल, गुड़, घी, कंबल और गर्म वस्त्रों का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।माघ मास में तामसिक भोजन से बचना चाहिए। कल्पवासी इस अवधि में दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।धार्मिक दृष्टि से माघ मास संयम, दान और साधना का महीना माना जाता है, जिसमें किए गए पुण्य कर्मों का फल विशेष रूप से प्राप्त होता है।

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