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IPL 2026 नीलामी में KKR की खरीद पर सियासी और धार्मिक विवाद, नेताओं और धर्मगुरुओं के बयान आमने-सामने

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 की नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) द्वारा बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को खरीदने के फैसले ने देश में राजनीतिक और धार्मिक बहस को जन्म दे दिया है। इस मुद्दे पर जहां कुछ भाजपा नेता और कथावाचक विरोध जता रहे हैं, वहीं मुस्लिम धर्मगुरु इसे खेल से जुड़ा फैसला बताते हुए सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगा रहे हैं।

इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने KKR की खरीद का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी फैसले का बिना संविधान और कानून को समझे विरोध करना गलत है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट टीम का मालिकाना और खिलाड़ियों का चयन फ्रेंचाइजी का अधिकार है। अगर कोई नियमों के खिलाफ काम होगा, तो कानून अपना रास्ता अपनाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम नाम सामने आते ही विरोध शुरू हो जाता है। मौलाना रशीदी ने बिना नाम लिए कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नफरत फैलाने वाले बयान समाज को बांटने का काम करते हैं और ऐसे बयानों से टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी देवकीनंदन ठाकुर और भाजपा नेता संगीत सोम की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमान भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंतित हैं और उनके समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में किसी बांग्लादेशी क्रिकेटर के साथ खेल अनुबंध को देशद्रोह से जोड़ना गलत है।

इससे पहले भाजपा नेता संगीत सोम ने देवकीनंदन ठाकुर के बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और भारत विरोधी गतिविधियों की खबरों के बीच किसी बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदना गलत संदेश देता है। उन्होंने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी।

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी KKR के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए टीम से मुस्तफिजुर रहमान को बाहर करने की मांग की है। मुंबई में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान दिए गए वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो हिंदू समुदाय KKR के बहिष्कार पर विचार कर सकता है। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि खिलाड़ी पर खर्च की जाने वाली राशि बांग्लादेश में पीड़ित हिंदू परिवारों की मदद में दी जानी चाहिए। इस पूरे विवाद के बीच KKR या IPL की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जबकि मामला खेल से निकलकर सियासी और धार्मिक बहस का रूप ले चुका है।

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