अन्तर्राष्ट्रीय

रूस-यूक्रेन युद्ध में इन बेज़ुबानों का क्या कसूर?

यूक्रेन और रूस के बीच जंग का आज 35 वां दिन है। एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यूक्रेन में तबाही का मंजर जारी है। रूस के लड़ाकू विमान, मिसाइल और टैंक समेत विभिन्न अत्याधुनिक हथियार यूक्रेन में कहर बरपा रहे हैं। यूक्रेन के शहरों में हर तरफ सिर्फ विनाश का मंज़र है। ध्वस्त इमारतें, जान बचाने को भागते लोग, खाने-पीने का संकट, दर्द से बेहाल बेज़ुबानों की तस्वीरें आपको रुला देंगी।

यूक्रेन में जारी युद्ध की वजह से लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा है, लेकिन इसके साथ-साथ यहां रहने वाले जानवरों को भी भीषण संकट से गुजरना पड़ रहा है। कई जानवर अपने मालिक से दूर हो गए हैं। कई तस्वीरों में घायल जानवरों की स्थिति देखी जा सकती है जो दर्द से गुजरने के बावजूद बोल भी नहीं सकते।

यूक्रेन में कई ऐसे लोग भी नजर आए जो किसी भी हाल में अपने पालतू जानवरों को अपने साथ लेकर जाने की जिद पर अड़े रहे।

 

ये तस्वीर आर्या एल्‍ड्रिन की हैं। वह भारत से मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गई थीं। लेकिन जब यूक्रेन में युद्ध के हालात बन गए तो वह साइबेरियन हस्‍की कुत्‍ते को अपने साथ लेकर आईं। वह कहती हैं, अगर वह अकेले आ जाती तो दुनिया उनको सेल्फिश कहकर संबोधित करती।

इस तस्वीर में एक शख्‍स कुत्‍ते को टूटे हुए पुल से इरपिन में ले जाता हुआ दिख रहा है। इरपिन कीव के उत्‍तर पश्चिम में मौजूद है। ये फोटो 28 मार्च की है। जहां कई लोग इस पुल को पार करते हुए देखे जा सकते हैं।

ये तस्‍वीर 28 मार्च की है। साउथ ईस्‍ट पोलैंड के प्रेज़ेमिसली में मौजूद वेटेनरी डॉक्‍टर एडीए फाउंडेशन सेंटर में बकरी का इलाज करते हुए नजर आए। इस बकरी के पैर में डॉक्‍टर ने प्‍लास्‍टर लगाया।

इस फोटो में एक महिला रूस यूक्रेन युद्ध के बाद क्षतिग्रस्‍त एक इमारत के बाहर अपने पालतू जानवर के साथ बैठी हुई है।

इस फोटो में एक कुत्‍ते का पैर टूटा हुआ दिख रहा है। ये फोटो दक्षिण पूर्व पोलैंड के प्रेज़ेमिसली की है, जहां डॉक्‍टर जैकब कोटोविच उसका इलाज कर रहे थे।

लगातार चल रहे गोले बारुद के बीच जानवरों के लिए भोजन का इंतज़ाम कर पाना इतना आसान नहीं है। फिर भी यहां का स्टाफ इनके लिए ज़रूरत का हर सामान इकट्टा करने की कोशिश में जी जान से जुटा हुआ है। पहले से जमा खाना अब खत्म हो रहा है ऐसे में संकट ये है कि अब ये बेजुबान क्या खाएंगे और कैसे रहेंगे।

धमाकों की आवाज़ के बीच जानवरों को शांत रखने के लिए दवाएं और एंटीडिप्रेशन दवाएं देनी पड़ रही हैं। युद्ध के मद्देनज़र जानवर भी कैद होकर रह गए हैं। ज़ू बंद है लिहाजा न कोई आने वाला है, न वो किसी को देख पा रहे हैं।

लाखों लोग देश छोड़कर जा चुके हैं, लेकिन दिक्कत जानवरों के लिए है. ऐसे में एक शख्स इन बेजुबानों के लिए मसीहा बनकर उभरा है। एक 32 वर्षीय शख्स इन जानवरों के लिए मसीहा बना है। ये शख्स युद्धग्रस्त यूक्रेन से बेसहारा जानवरों को बाहर निकालने में जुटा हुआ है।

यूक्रेन की एक और तस्वीर जो आपको भावुक कर देगी। एक महिला विकलांग कुत्तों को #Irpin, #Kyiv क्षेत्र में उन ठिकानों से बचा रही है, जो भारी रूसी गोलाबारी और हवाई हमलों के अधीन है।

 

 

 

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