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पर्यावरण के लिए जोखिम हो सकते हैं एंटीबॉयोटिक्स

नई दिल्ली। एंटीबायोटिक विभिन्न प्रकार के जीवाणु संक्रमण से सुरक्षा और उनसे होने वाले रोगों को दूर करने में इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन एक अध्ययन में चेताया गया है कि यह एक स्वस्थ वातावरण के लिए जरूरी रोगाणुओं को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
शोध के अनुसार, यह महत्वपूर्ण रूप से पूरे विश्व के लोगों के जीवन पर असर डाल सकते हैं। जब लोग एंटीबायोटिक दवाइयां लेते हैं, तो शरीर में दवाओं के केवल एक हिस्से का चयापचय होता है, बाकी बाहर निकल जाता है।
चूंकि अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र को एंटीबायोटिक या अन्य दवा संयुग्मों को पूरी तरह से हटाने के लिए डिजाइन नहीं किए जाते हैं, इसलिए इनमें से कई यौगिक प्राकृतिक प्रणालियों तक पहुंच जाते हैं जहां वे ‘अच्छे’ रोगाणुओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
शोधार्थियों ने कहा कि यह चिंता वाली बात है, क्योंकि पर्यावरण में पाए जाने वाले कई सूक्ष्मजीवों की प्रजातियां लाभकारी होती हैं, जो पोषक तत्वों के प्राकृतिक चक्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।इटली में नेशनल रिसर्च काउंसिल के वॉटर रिसर्च इंस्टीट्यूट की माइक्रोबॉयल इकोलॉजिस्ट पाओला ग्रेनिनी ने कहा, एंटीबायोटिक दवाओं की मात्रा बहुत ही कम है – सामान्य रूप से प्राकृतिक वातावरण में पाए जाने वाले अणु प्रति लीटर में प्रति नैनोग्राम होते हैं।
उन्होंने कहा, लेकिन एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं कम सांद्रता में भी प्रभाव डाल सकती हैं, जिसके फलस्वरूप पर्यावरणीय दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।
यह शोध ‘माइक्रकेमिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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